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Jul 15, 2026 janta24x7news

नेपाल में 'धुर्बे' जंगली हाथी का आतंक, 14 साल बाद एक ही परिवार के दो और सदस्यों की मौत

नेपाल के चितवन क्षेत्र में 'धुर्बे' नाम के एक जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के दो और लोगों की मौत हो गई। इससे पहले वर्ष 2012 में इसी हाथी के हमले में परिवार के दो अन्य सदस्य भी मारे गए थे। घटना के बाद जंगली हाथियों के बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

नेपाल में 'धुर्बे' जंगली हाथी का आतंक, 14 साल बाद एक ही परिवार के दो और सदस्यों की मौत
नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान (Chitwan National Park) के आसपास स्थित क्षेत्रों में जंगली हाथियों का खतरा एक बार फिर चर्चा में है। 'धुर्बे' नाम से पहचाने जाने वाले एक जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई। यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वर्ष 2012 में इसी हाथी के हमले में इसी परिवार के दो अन्य सदस्यों की भी जान चली गई थी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ित परिवार मूल रूप से माड़ी क्षेत्र का रहने वाला था। वर्ष 2012 में हाथी के हमले में परिवार के बुजुर्ग दंपति की मौत के बाद परिवार ने सुरक्षा कारणों से अपना घर छोड़ दिया था और राप्ती नदी पार कर चितवन जिले के जगतपुर क्षेत्र में जाकर बस गया था। परिवार को उम्मीद थी कि स्थान बदलने के बाद वे जंगली हाथियों के खतरे से सुरक्षित रहेंगे।

हाल ही में हुए हमले में 'धुर्बे' नामक हाथी कथित रूप से जगतपुर क्षेत्र तक पहुंच गया। इस हमले में परिवार की 25 वर्षीय महिला सदस्य और चार वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

वन अधिकारियों के अनुसार, 'धुर्बे' नेपाल के उन जंगली हाथियों में शामिल है, जिन्हें मानव बस्तियों में प्रवेश करने और लोगों पर हमले करने के कारण अत्यधिक खतरनाक माना जाता है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में इस हाथी के हमलों में दो दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हालांकि, अलग-अलग स्रोतों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है और इसकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित वन अधिकारियों द्वारा समय-समय पर की जाती रही है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल और भारत के कई सीमावर्ती इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। जंगलों का दायरा कम होने, प्राकृतिक आवास में बदलाव और भोजन की तलाश में जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने से ऐसे हादसों में वृद्धि देखी जा रही है। हाथियों की स्मरण शक्ति काफी विकसित मानी जाती है, लेकिन किसी विशेष परिवार को वर्षों बाद पहचानकर निशाना बनाने के दावों की वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ यूजर्स हाथियों की याददाश्त का उल्लेख कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों और भावनात्मक टिप्पणियों को तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

घटना के बाद नेपाल के वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से रात के समय जंगल से सटे इलाकों में सावधानी बरतने और किसी भी जंगली हाथी की गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में दीर्घकालिक समाधान के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने वाली योजनाओं और सुरक्षित आवास प्रबंधन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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