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Jun 18, 2026 Soumya

परिसीमन को लेकर फिर गरमाई सियासत, सरकार क्यों चाहती है संसद में दो-तिहाई बहुमत?

देश में परिसीमन (Delimitation) को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्र सरकार की कोशिश संसद में आवश्यक समर्थन जुटाने की है, क्योंकि इससे जुड़े संवैधानिक बदलावों के लिए विशेष बहुमत की जरूरत पड़ सकती है।

परिसीमन को लेकर फिर गरमाई सियासत, सरकार क्यों चाहती है संसद में दो-तिहाई बहुमत?
भारत की राजनीति में इन दिनों परिसीमन (Delimitation) एक बड़ा मुद्दा बनकर उभर रहा है। आगामी जनगणना और संसदीय सीटों के पुनर्गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने पर इतना जोर क्यों दे रही है।

दरअसल, परिसीमन का अर्थ है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बढ़ती या घटती आबादी के अनुसार नागरिकों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत में लंबे समय से सीटों के पुनर्वितरण पर रोक लगी हुई थी, लेकिन अब इसे लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने सीटों के पुनर्गठन और प्रतिनिधित्व से जुड़े व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखा था। चूंकि ऐसे बदलाव संविधान और चुनावी ढांचे से जुड़े माने जाते हैं, इसलिए कई मामलों में संसद में विशेष बहुमत यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक दलों के बीच संख्या बल को लेकर रणनीतिक तैयारियां चल रही हैं।

परिसीमन को लेकर सबसे बड़ी बहस उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर है। कुछ राज्यों का तर्क है कि जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया, उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी उठ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है या नए सिरे से आवंटन किया जाता है, तो देश की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे कई राज्यों की संसद में हिस्सेदारी बढ़ सकती है, जबकि कुछ राज्यों की सापेक्ष राजनीतिक ताकत प्रभावित हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार परिसीमन केवल सीटों का गणित नहीं है, बल्कि यह संघीय ढांचे, क्षेत्रीय संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय भी है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

फिलहाल सरकार और विपक्ष दोनों इस विषय पर अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। आने वाले समय में संसद और राजनीतिक मंचों पर परिसीमन का मुद्दा और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है।
Author - Soumya
Credit - Political Desk

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