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Jul 10, 2026 janta24x7news

करूर भगदड़ मामले में विजय सरकार को हाईकोर्ट से राहत, पीड़ित परिवारों की नौकरी योजना पर रोक से इनकार

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने करूर TVK रैली भगदड़ मामले में तमिलनाडु सरकार को राहत देते हुए पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने कहा कि सभी नियुक्तियां अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

करूर भगदड़ मामले में विजय सरकार को हाईकोर्ट से राहत, पीड़ित परिवारों की नौकरी योजना पर रोक से इनकार
करूर में हुई TVK रैली भगदड़ मामले में मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु सरकार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 लोगों के परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां फिलहाल अस्थायी मानी जाएंगी और मामले में आने वाले अंतिम न्यायिक फैसले के अधीन रहेंगी।

जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस शक्तिवेल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस चरण पर अदालत सरकार के नीतिगत फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि लाभार्थियों को पहले महीने का वेतन मिलने से पहले इस मामले की अगली सुनवाई पूरी कर ली जाए, ताकि यदि आवश्यक हो तो उचित आदेश जारी किए जा सकें। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) को भी स्वतः इस मामले में पक्षकार बनाया। साथ ही अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। करूर भगदड़ मामले की जांच फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में CBI कर रही है।

यह याचिका नाम तमिलर काची के नेता थीरन थिरुमुरुगन और मनिथानेया जननायगा काची के पदाधिकारी सीनी अहमद की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने सरकार की उस योजना पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसके तहत भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव रखा गया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस तरह की नियुक्तियां तमिलनाडु लोक सेवा आयोग और अन्य वैधानिक भर्ती प्रक्रियाओं को दरकिनार करेंगी। उनका कहना था कि इससे सरकारी नौकरियों में समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांत पर भी असर पड़ेगा और भविष्य के लिए गलत उदाहरण स्थापित हो सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि चूंकि मामले की जांच CBI कर रही है, इसलिए इस दौरान सरकारी नौकरी देने से गवाहों के प्रभावित होने की आशंका पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी दलील दी कि राज्य की पिछली बड़ी त्रासदियों में पीड़ित परिवारों को इस प्रकार सरकारी नौकरी नहीं दी गई थी, इसलिए ऐसी योजना के लिए स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि जिन परिवारों ने अपने परिजन खोए हैं, उन्हें आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराने में क्या आपत्ति है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायालय राजनीतिक बहस का मंच नहीं है और सभी पक्षों को केवल कानूनी पहलुओं तक ही अपनी दलीलें सीमित रखनी चाहिए।

फिलहाल हाईकोर्ट ने सरकार की योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सभी नियुक्तियां अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेंगी। अब इस मामले पर सभी की निगाहें 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत आगे की प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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