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Jul 06, 2026 janta24x7news

J&K स्कूलों में विवादित किताबों पर बड़ा एक्शन, UAPA के तहत FIR, 8 अधिकारी सस्पेंड

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी दो किताबों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इन पुस्तकों में अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया तथा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने दोनों किताबों को तत्काल स्कूलों से हटाने का आदेश दिया। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित किया गया, एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं और संबंधित लेखकों व प्रकाशकों के खिलाफ UAPA समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी किताबें सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक कैसे पहुंचीं।

J&K स्कूलों में विवादित किताबों पर बड़ा एक्शन, UAPA के तहत FIR, 8 अधिकारी सस्पेंड
जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई दो किताबों को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन पुस्तकों पर आरोप है कि इनमें अलगाववादी विचारधारा से जुड़े नेताओं और आतंकवाद से जुड़े कुछ व्यक्तियों का सकारात्मक या महिमामंडन करने वाला उल्लेख किया गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में कुछ ऐसे शब्दों और संदर्भों का उपयोग भी बताया गया है जिन्हें प्रशासन ने राष्ट्रीय हित और संवेदनशीलता के लिहाज से आपत्तिजनक माना है।

मामला सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों किताबों को सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से हटाने का आदेश दिया। साथ ही शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। प्रशासन ने इस पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन पुस्तकों के चयन, अनुमोदन और वितरण की प्रक्रिया में लापरवाही कहां हुई।

प्रशासन ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को भी ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की है। पुलिस ने दोनों प्रकाशकों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इसके बाद प्रकाशकों के परिसरों पर छापेमारी भी की गई और जांच एजेंसियां दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये पुस्तकें शिक्षा विभाग की पुस्तक खरीद प्रक्रिया के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची थीं। अब जांच का मुख्य विषय यह है कि चयन समिति ने इन पुस्तकों को किस आधार पर मंजूरी दी और समीक्षा प्रक्रिया में ऐसी सामग्री की पहचान क्यों नहीं हो सकी। सरकार ने पूरी खरीद और अनुमोदन प्रक्रिया की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकों का बच्चों के विचारों और व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में किसी भी पुस्तक की सामग्री का तथ्यों, संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होना आवश्यक है। यही कारण है कि इस मामले ने केवल जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश में स्कूल लाइब्रेरी की पुस्तक चयन प्रक्रिया पर बहस छेड़ दी है।

हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है जब किसी शैक्षणिक सामग्री को लेकर विवाद सामने आया हो। पहले भी विभिन्न राज्यों में इतिहास, राजनीति, धार्मिक संदर्भों और पाठ्यक्रम की सामग्री को लेकर विवाद होते रहे हैं। लेकिन इस मामले को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि आरोप आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े व्यक्तियों के कथित महिमामंडन से संबंधित हैं, जिसके चलते प्रशासन ने सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विवादित सामग्री पुस्तकों में कैसे शामिल हुई, किस स्तर पर इसकी समीक्षा हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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