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Jul 14, 2026 janta24x7news

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर घमासान, 18 मौतों के बाद भी कारण स्पष्ट नहीं; स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर विवाद

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद हुई कई महिलाओं की मौत को लेकर सियासी और प्रशासनिक विवाद गहरा गया है। जांच अभी जारी है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के "मिलते हैं ब्रेक के बाद" बयान ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर घमासान, 18 मौतों के बाद भी कारण स्पष्ट नहीं; स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर विवाद
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद हुई महिलाओं की मौत के मामलों ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई 2026 से अब तक सामने आए कई मामलों में मातृ मृत्यु की घटनाओं को लेकर जांच जारी है। इन घटनाओं के बाद विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि सभी मामलों की गहन जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

मामले के अनुसार, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, कोटा, बीकानेर और जोधपुर समेत कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामले सामने आए। इन घटनाओं ने मरीजों की सुरक्षा और सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही हुई, जबकि प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है।

शुरुआती जांच में संक्रमण, सेप्सिस, किडनी फेलियर और कुछ दवाओं व इंजेक्शन की गुणवत्ता जैसे कई पहलुओं की जांच की गई है। हालांकि, अब तक किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए सभी मौतों को किसी एक वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा।

इस बीच स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक बयान भी विवादों में आ गया। जयपुर में एक समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने प्रेस वार्ता समाप्त करते समय मुस्कुराकर कहा, "मिलते हैं ब्रेक के बाद।" इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे पीड़ित परिवारों के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया और सरकार की आलोचना की।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई विपक्षी नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं सरकार ने कहा है कि मामले का राजनीतिकरण करने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर, एम्स जोधपुर और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की टीमों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। अस्पतालों में इस्तेमाल हुई दवाओं, इंजेक्शनों, ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है। सरकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस का विषय बना हुआ है। जांच पूरी होने के बाद ही इन मौतों की वास्तविक वजह और संभावित जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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