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Jul 07, 2026 janta24x7news

Karur Stampede Case: सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज की, CM विजय को पीड़ितों से मिलने और मुआवजा देने की मिली राहत

करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DMK की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय को पीड़ित परिवारों से मिलकर मुआवजा और नौकरी का पत्र देने से रोकने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री के कामकाज को तय नहीं कर सकता।

Karur Stampede Case: सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका खारिज की, CM विजय को पीड़ितों से मिलने और मुआवजा देने की मिली राहत
तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DMK को बड़ा झटका देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में मुख्यमंत्री विजय को हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलने, मुआवजा वितरित करने और नौकरी के नियुक्ति पत्र देने से रोकने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री के कामकाज या उनकी प्रशासनिक गतिविधियों को नियंत्रित नहीं कर सकता।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने DMK के वकील से कहा कि न्यायालय राजनीतिक विवादों का मंच नहीं है। अगर किसी राजनीतिक दल को सरकार के किसी फैसले पर आपत्ति है, तो उसका जवाब राजनीतिक स्तर पर दिया जाना चाहिए, न कि हर मुद्दे को अदालत में लाया जाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सत्तारूढ़ टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) अपने पक्ष में बयान दे रही है, तो विपक्ष भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकता है।

DMK का आरोप था कि पिछले वर्ष करूर में टीवीके की रैली के दौरान हुई भगदड़ की जांच अभी जारी है। ऐसे में मुख्यमंत्री विजय का पीड़ित परिवारों से मिलना, उन्हें 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का आश्वासन देना जांच को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की थी।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री विजय के करूर दौरे और पीड़ित परिवारों को राहत राशि तथा नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपने का रास्ता साफ हो गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष सितंबर में करूर में टीवीके की एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। शुरुआत में मामले की जांच मद्रास हाई कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच राज्य पुलिस से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। मामले की निगरानी अदालत द्वारा गठित एक समिति भी कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पीड़ित परिवारों को राहत देने जैसे प्रशासनिक फैसलों में अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगी, जब तक कोई स्पष्ट कानूनी या संवैधानिक उल्लंघन सामने न आए।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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