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Jul 17, 2026 janta24x7news

अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान पर किया हमला, बंदर अब्बास बना निशाना; हूती विद्रोहियों को अलर्ट पर रखा गया

अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान के रणनीतिक शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत यमन के हूती विद्रोहियों को रेड सी में हमले की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान पर किया हमला, बंदर अब्बास बना निशाना; हूती विद्रोहियों को अलर्ट पर रखा गया
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस बार हमलों का प्रमुख निशाना ईरान का बंदर अब्बास क्षेत्र और उसके आसपास मौजूद सैन्य ठिकाने रहे। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह होने के साथ-साथ उसकी नौसेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र भी माना जाता है।

अमेरिकी सेना का कहना है कि हमलों में तटीय निगरानी प्रणाली, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री क्षमताओं को निशाना बनाया गया। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर उसके प्रभाव को कम करना बताया गया है।

इस बीच रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत यमन के हूती विद्रोहियों को रेड सी (लाल सागर) के बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हमले के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। हालांकि अभी तक हूती विद्रोहियों की ओर से किसी नए हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हूती विद्रोही रेड सी में जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है। यदि रेड सी और होर्मुज दोनों महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर बड़ा दबाव पड़ सकता है।

उधर, ईरान ने भी अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।

फिलहाल दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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