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Jul 10, 2026 janta24x7news

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील पर छिड़ी सियासी जंग, कांग्रेस ने BJP से कहा- पहले अपना होमवर्क ठीक करें

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी 2011 में ही दे दी थी और भाजपा को इतिहास का सही अध्ययन करना चाहिए।

भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील पर छिड़ी सियासी जंग, कांग्रेस ने BJP से कहा- पहले अपना होमवर्क ठीक करें
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम सहयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान हुए यूरेनियम समझौते को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। दोनों दल इस समझौते की पृष्ठभूमि और उपलब्धि को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करने का हवाला देते हुए यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता संभव हो पाया, जो भारत की बढ़ती वैश्विक साख और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।

भाजपा के इस दावे पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भाजपा इस समझौते का पूरा श्रेय वर्तमान सरकार को देने की कोशिश कर रही है, जबकि इसकी नींव वर्षों पहले रखी जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2011 में तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी हासिल कर ली थी। यह निर्णय 2008 में हुए भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद संभव हुआ था।

जयराम रमेश ने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के नेताओं और समर्थकों को इस विषय पर तथ्यात्मक जानकारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर 2011 की मीडिया रिपोर्ट का हवाला भी साझा किया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी द्वारा भारत को यूरेनियम निर्यात का समर्थन किए जाने का उल्लेख था।

कांग्रेस का कहना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु सहयोग की प्रक्रिया एक लंबे कूटनीतिक प्रयास का परिणाम है और इसे केवल किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। पार्टी का दावा है कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा तैयार की गई रणनीतिक नींव ने आगे के समझौतों का रास्ता बनाया।

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। पार्टी के अनुसार, आज भारत को विश्व एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है और इसी बदलती अंतरराष्ट्रीय छवि के कारण ऐसे महत्वपूर्ण समझौते संभव हो रहे हैं।

यूरेनियम समझौते को लेकर शुरू हुई यह सियासी बहस आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। फिलहाल दोनों प्रमुख दल अपने-अपने दावों के समर्थन में पुराने दस्तावेजों और राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा केवल विदेश नीति तक सीमित न रहकर राजनीतिक श्रेय की लड़ाई का भी हिस्सा बन गया है।
Author - Janta24x7news
Credit - Janta24x7news

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